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समर्थन क्या है?

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Message of Hon'ble Prime Minister of India Shri Narendra Modi on the occasion of the International Day of Solidarity with the Palestinian people.#[email protected]@[email protected]@[email protected]@[email protected]/21hqbcozsj — India in Palestine - الهند في فلسطين (@ROIRamallah) November 29, 2022

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) क्या होता है और खरीफ फसल सीजन 2020-21 के लिए कितना है?

खरीफ फसल सीज़न 2020-21 के लिए धान (सामान्य) का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाकर 1,868 प्रति क्विंटल कर दिया गया है. सरकार हर वर्ष बुबाई से पहले, कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों पर 22 अनिवार्य फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की घोषणा करती है.

Minimum Support Price of Kharif crops for 2020-21

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) क्या है? (What is Minimum Support Price (MSP)

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), भारत में कृषि उपज के लिए न्यूनतम मूल्य की गारंटी है. MSP की घोषणा भारत सरकार द्वारा कुछ निश्चित फसलों के लिए बुवाई के मौसम की शुरुआत में की जाती है, ताकि उत्पादक यानी किसानों को इस बात की गारंटी प्रदान की जा सके कि देश में कितना भी अधिक खाद्यान्न उत्पन्न हो जाये, किसानों को उनकी फसल का एक निश्चित मूल्य मिलेगा. इस प्रकार MSP किसानों को अधिक फसल बुबाई के लिए प्रेरित करता है.

कितनी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित किया जाता है (How many crops are under Minimum Support Price (MSP)

भारत में कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों पर 'कृषि विभाग और सहयोग, भारत सरकार' द्वारा 22 फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया जाता है.

इन 22 फसलों में 6 रबी फसलें, 14 खरीफ मौसम की फसलें, और दो अन्य वाणिज्यिक फसलें हैं. इनका विवरण इस प्रकार है; अनाज (7), गेहूं, धान, बाजरा, जौ, ज्वार, रागी और मक्का; जबकि दलहन की 5 फसलें इस प्रकार हैं; अरहर, चना, उड़द, मूंग, और मसूर और तिलहन की 8 फसलें शामिल हैं. ये फसलें हैं; रेपसीड / सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, तोरिया, तिल, केसर बीज, सूरजमुखी के बीज और रामतिल (Nigerseed).

सभी अनिवार्य खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 1 जून, 2020 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) द्वारा बढ़ाए गए हैं.

वर्ष 2020-21 के लिए सभी खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (Minimum Support Prices (MSPs) for all Kharif crops for 2020-21):-

PM मोदी ने फिलिस्तीन के लिए अटूट समर्थन की प्रतिबद्धता दोहराई, कहा- हमारा साझा इतिहास

साल 2018 से भारत (India) ने संयुक्त राष्ट्र (UN) की फिलिस्तीन (Palestine) के लिए राहत और कार्य एजेंसी (UNRWA) को 22.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता दी है.

PM मोदी ने फिलिस्तीन के लिए अटूट समर्थन की प्रतिबद्धता दोहराई, कहा- हमारा साझा इतिहास

साल 1974 में भारत पहला गैर अरब देश बना था जिसने फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइज़ेशन (PLO) को मान्यता दी थी. (File Photo)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने मंगलवार को फिलिस्तीन (Palestine) के लिए भारत के "अटूट समर्थन की प्रतिबद्धता को दोहराया". फलिस्तीन के लोगों के लिए अंतरराष्ट्रीय एकजुटता प्रदर्शित को रखे गए दिन पर, संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित वार्षिक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- फिलिस्तीन लोगों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करने वाले इस दिन पर, मैं फिलिस्तीन मुद्दे पर भारत के अटूट समर्थन को दोहरता हूं." प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "भारत और फिलिस्तीन के दोस्ताना लोगों के साझा ऐतिहासिक संबंध हैं. हमने हमेशा आत्मनिर्भरता और सम्मान के साथ सामाजिक और आर्थिक विकास खोज रहे फिलिस्तीन के लोगों का सर्मथन किया है. हमें उम्मीद है कि फिलिस्तीनऔर इज़रायली पक्ष के बीत सीधी बातचीत होगी और वो एक समग्र और आपसी सहमति वाला उपाय खोज लेंगे. "

Message of Hon'ble Prime Minister of India Shri Narendra Modi on the occasion of the International Day of Solidarity with the Palestinian people.#[email protected]@[email protected]@[email protected]@[email protected]/21hqbcozsj

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इस साल अक्टूबर में, भारत ने फिलिस्तीन के लिए 2.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर का एक चेक एक संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी को दिया था. यह फिलिस्तीन के लिए समर्थन क्या है? वार्षिक 5 मिलियन के समर्थन के हिस्से के तौर पर दिया गया. संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी द्वारा यह फिलिस्तीनी शरणार्थियों के स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र सीधे तौर से खर्च होने होते हैं.

साल 2018 से भारत ने संयुक्त राष्ट्र की फिलिस्तीन के लिए राहत और कार्य एजेंसी (UNRWA) को 22.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता दी है.

प्रधानमंत्री मोदी ने एक बयान में कहा, "भारत सरकार और लोगों की तरफ से मैं फिलिस्तीन के लोगों को देश का दर्जा, शांति और संपन्नता पाने की यात्रा के लिए शुभकामनाएं देता हूं."

भारत-फिलिस्तीन के रिश्ते करीब समर्थन क्या है? आधी सदी पुराने हैं. साल 1974 में भारत पहला गैर अरब देश बना था जिसने फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइज़ेशन (PLO) को मान्यता दी थी. इसके 14 साल बाद भारत उन कुछ देशों में से है जो फिलिस्तीन को एक देश के तौर पर मान्यता देता है. फिलिस्तीन के साथ राजनैतिक संबंध 1996 में बढ़े जब भारत ने गज़ा में अपने प्रतिनिधि का दफ्तर खोला. बाद में इसे 2003 में रमल्ला में स्थानांतरित कर दिया गया.

‘कलम की जगह बंदूक’ से सियासी फायरिंग: MLA बृहस्पत के समर्थन में उतरे धरमलाल कौशिक, बोले- शिक्षा व्यवस्था चौपट, सीटें खाली, आखिर छात्रों का क्या होगा भविष्य ?

रायपुर। छत्तीसगढ़ में अपनी सरकार के मंत्री और विभाग पर तीखे सवाल दागकर कांग्रेस विधायक बृहस्पत सिंह ने विपक्ष को सियासी हथियार दे दिया है, जिससे अब सरकार पर बीजेपी एक के बाद एक घावदार प्रहार कर रही है. इसी कड़ी में अब पूर्व नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने छत्तीसगढ़ सरकार पर ‘कलम की जगह बंदूक’ मामले में सियासी फायरिंग की है.

दरअसल, बृहस्पत सिंह के पत्र पर अब सियासत तेज हो समर्थन क्या है? गई है. पूर्व नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि छात्रों को विवश और लाचारी के दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार धकेलने का काम कर रही है.

धरमलाल कौशिक ने कहा कि कांग्रेस की सरकार नर्सिंग छात्रों को कलम की जगह बंदूक थमाने की तैयारी में है. कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक के द्वारा मुख्यमंत्री को पत्र लिखा गया समर्थन क्या है? है कि नर्सिंग कॉलेजों में प्रवेश नहीं हो रहा है.

कौशिक ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार नरुआ गरूआ घुरुआ बारी से उबर नहीं रही है. शिक्षा व्यवस्था चौपट हो रही है, सीटें खाली हैं. अफसर अलग-अलग प्रक्रिया और कानून की बात कर रहे हैं. आखिर छात्रों का भविष्य क्या होगा ?.

क्या है पूरा मामला ?
बता दें कि रामानुजगंज विधायक बृहस्पत सिंह ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखा है. उन्होंने पत्र में निवेदन करते हुए लिखा है कि छत्तीसगढ़ में शासकीय, अर्द्धशासकीय और निजी नर्सिंग महावद्यिालयों में विभाग की उदासीनता से करीब 2700 नर्सिंग समर्थन क्या है? छात्र-छात्राओं की सीटें खाली हैं. 12वीं पास छात्र-छात्राएं नर्सिंग की पढ़ाई करने के लिए कॉलेजों में दर-दर भटक रहें हैं. लेकिन सीटें रिक्त होने के बाद भी उन्हें प्रवेश नहीं दिया जा समर्थन क्या है? रहा है.

बृहस्पत सिंह ने आगे लिखा है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के संज्ञान में पिछले साल छात्रों ने ये बात लाई थी तो 2021-22 सहित पिछले तीन वर्षों तक प्रवेश दिया जाता रहा है. इस साल स्वास्थ्य शिक्षा विभाग के तानाशाही रवैया के कारण अभी तक नर्सिंग की पढ़ाई करने वाले छत्तीसगढ़ के विद्यार्थी अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग और अति गरीब छात्र-छात्राएं महिनों से प्रवेश के लिए गुहार लगाते-लगाते थक चुके हैं. शासन-प्रशासन से मोह भंग हो चुका है. प्रवेश देने से राज्य सरकार के पर या विभाग के उपर कोई वित्तीय भार भी नहीं होगा.

कलम की जगह बंदूक पकड़ाना चाहते हैं अफसर : विधायक

विधायक ने लिखा है कि छत्तीसगढ़ के छात्र-छात्राएं नर्सिंग की पढ़ाई कर अपने पैरों खड़ा खड़ा होना चाहते हैं. छत्तीसगढ़ और समाज के मुख्य धारा के साथ जुड़कर राज्य के विकास में भागीदारी निभाना चाहते हैं. लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की मनमानी और लाल फीताशाही इन्हें स्वास्थ्य शिक्षा से वंचित कर रही है. इनके हाथ में कलम की जगह बंदूक पकड़ाना चाहती है. जो छत्तीसगढ़ के युवाओं और राज्य के लिए चिंताजनक विषय है.

छत्‍तीसगढ़ में अब तक 13.34 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी, किसानों को लगभग 2803 करोड़ रुपये का भुगतान

छत्‍तीसगढ़ में अब तक 13.34 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी, किसानों को लगभग 2803 करोड़ रुपये का भुगतान

रायपुर (राज्य ब्यूरो)। छत्तीसगढ़ में किसानों से अब तक समर्थन मूल्य पर 13.34 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है। धान खरीदी के एवज में तीन लाख 85 हजार 822 किसानों को लगभग 2803 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान कर दिया गया है। राज्य सरकार द्वारा धान उपार्जन की बेहतर व्यवस्था के चलते किसानों को अब धान बेचने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ रहा है। धान खरीदी के समानांतर कस्टम मिलिंग के लिए धान का उठाव भी जारी है। समितियों से अब तक 5.73 लाख मीट्रिक टन धान का उठाव किया जा चुका है। इस वर्ष समर्थन मूल्य पर 110 लाख मीट्रिक टन धान के उपार्जन का अनुमान है।

राज्य सरकार द्वारा धान बेचने वाले किसानों की सुविधा के लिए टोकन तुंहर हाथ एप बनाया गया है। इसके जरिए किसान आनलाइन टोकन प्राप्त कर रहे हैं। किसानों को मेन्युअल तरीके से भी अग्रिम में टोकन दिया जा रहा है, जिसके चलते किसानों से धान उपार्जन सुगमता से हो रहा है।

किसान के खाते से 42 क्विंटल धान खपाने की कोशिश, धान खरीदी केंद्र में जांच में सामने आई ये बात

खाद्य विभाग के सचिव टोपेश्वर वर्मा ने बताया कि 23 नवंबर को 38,498 किसानों से 1,30,098 मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई है, इसके अलावा आनलाइन प्राप्त टोकन के जरिए किसानों से 23,666 मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीदी की गई। आगामी दिवस की धान खरीदी के लिए 50,283 टोकन तथा टोकन तुंहर हाथ एप के जरिये 7265 टोकन आनलाइन जारी किए गए हैं।

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी धान खरीदी के साथ-साथ धान का उठाव किया जा रहा है। अब तक 8,46,831 मीट्रिक टन धान के उठाव के लिए डीओ जारी किए गए समर्थन क्या है? हैं, जिसके एवज में उपार्जन केंद्रों से 5 लाख मीट्रिक टन धान का उठाव हो चुका है।

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