विदेशी मुद्रा हेजिंग रणनीति

सरल चलती औसत क्या है

सरल चलती औसत क्या है
मंगलवार को भी मेंथा ऑयल में गिरावट आई है.

औसत चाल(average speed)

उदाहरणार्थ,रेलमार्ग से राँची से पटना के बीच की दूरी 414 km है। पटना-हटिया सुपरफास्ट ट्रेन पटना से 11.00 बजे दिन में चलकर रात 8.00 बजे राँची पहुँचती है। अतः,उसे 414 km दूरी तय करने में 9 घंटे लगता है। इस 9 घंटे के समय अंतराल में

पटना-हटिया सुपरफास्ट ट्रेन की औसत चाल

औसत चाल से केवल यह अनुमान होता है कि पुरे समय अंतराल में कोई वस्तु कितनी तेज चल रही है।किन्तु इससे यह पता नहीं चलता कि किसी विशेष क्षण(instant) पर उस वस्तु की चाल क्या थी।

उदाहरणार्थ, यदि किसी ट्रेन की चाल शाम के चार बजे निकलना हो,तो हम एक छोटे समय अंतराल,जैसे 4.00 p.m से 4.01 p.m तक उसके द्वारा तय की गई दूरी मापते हैं। यदि यह दूरी 1.2 किलोमीटर हो,तो 4.00 p.m से 4.01 p.m के बीच ट्रेन की औसत चाल

चूँकि यह समय अंतराल, 1 मिनट,बहुत छोटा है,इसीलिए हम मान लेते हैं कि इस छोटे से समय अंतराल में ट्रेन की चाल एकसमान(uniform) रही होगी। अतः,हम किसी वस्तु की,किसी क्षण,चाल इस प्रकार परिभाषित कर सकते हैं।

किसी वस्तु द्वारा एक छोटे समय अंतराल में तय की गई दूरी और उस समय अंतराल के अनुपात को उस वस्तु की चाल (speed) कहते हैं।

एकसमान चाल(uniform speed)

यदि कोई वास्तु बराबर समय अंतराल में बराबर दूरी तय करे,चाहे वह समय अंतराल कितना ही छोटा क्यों न हो,तो कहा जाता है कि वह एकसमान चाल(uniform speed) से सरल चलती औसत क्या है गति कर रही है।

यदि कोई वस्तु एकसमान चाल से गति कर रही हो,तो किस क्षण उसकी चाल किसी भी समय अंतराल में उसके औसत चाल के बराबर होती है। यदि वस्तु किसी समय अंतराल t में s दूरी तय करती हो,तो किसी क्षण उसकी चाल

दूरी को समय से विभाजित करने से चाल मिलती है।

अतः,चाल का मात्रक =दूरी का मात्रक /समय का मात्रक

यदि दूरी को मीटर(m) में और समय को सेकंड(s) में मापा जाए तो चाल का SI मात्रक मीटर/सेकंड (m/s) होगा।

यदि दूरी को किलोमीटर(km) में और समय को घंटा (hour संक्षेप में h) में मापा जाए तो चाल का मात्रक किलोमीटर/घंटा (km/h) होगा। हम इन मात्रकों को एक-दूसरे में बदल भी सकते हैं। उदहारण के लिए,

1 km/h =1000 m /(60×60 s)

अर्थात, एक ही वस्तु की चाल का संख्यात्मक मान भिन्न-भिन्न होता है। ध्यान दें कि दो राशियों की तुलना करने में उन्हें समान मात्रकों में व्यक्त होना चाहिए।

कुछ वस्तुओं की औसत चाल

कुछ वस्तुओं की औसत चाल

चाल प्रायः असमान (nonuniform) होती है। जब कोई रेलगाड़ी एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक जाती है तब पहले स्टेशन पर वह रुकी रहती है,अर्थात उसकी चाल शून्य होती है,प्रस्थान करने पर गाड़ी अपनी चाल बढाती(speed up)है ,कुछ समय अंतराल तक अचर चाल से चलती है,वह तब चाल धीमी (slow down) करती है। और दूसरे स्टेशन पर अंत में रुक जाती है,अर्थात सरल चलती औसत क्या है उसकी चाल फिर शून्य हो जाती है। अतः चाल बढ़ाने या चाल धीमी करने के दौरान रेलगाड़ी समान समय अंतराल में असमान दूरी तय करती है ;अर्थात उसकी चाल असमान चाल होती है।

दृष्टव्य - जब किसी वस्तु की चाल में परिवर्तन होता है,अर्थात जब वस्तु की चाल बढ़ती है या घटती है,तो हम कहते हैं कि वस्तु को त्वरण (accelaration) प्राप्त है या कि वस्तु त्वरित हो रही(accelerating) है।

समान और असमान गति का प्रायोगिक प्रदर्शन -

इसके लिए एक क्षैतिज तख्ते से कब्ज़ा द्वारा जुड़े एक नत (या आनत) तख्ते पर एक गुटका (या बलॉक) रखते हैं और नत तख्ते का झुकाव-कोण बढ़ाते हैं। हम देखते हैं कि एक निश्चित झुकाव कोण पर गुटका को नत तख्ते पर नीचे की ओर चलाने पर वह समान समय अंतरालों में समान(बराबर) दूरियाँ तय करता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि गुटके की गति समान(या एकसमान,uniform) है।

समान और असमान गति का प्रायोगिक प्रदर्शन -

अब,नत सरल चलती औसत क्या है तख्ते का झुकाव-कोण बढ़ाते हैं। हम देखते हैं कि गुटका तेज गति से नत तख्ते पर नीचे की ओर चलने लगता है और वह समान समय अंतरालों में बढ़ी हुई (अर्थात अधिक) दूरियाँ तय करता है। इससे स्पष्ट सरल चलती औसत क्या है होता है कि अब गुटके की गति असमान(या नैकसमान,nonuniform) है।

किसी वस्तु की चाल से हमें यह पता चलता है कि वस्तु कितनी तेजी से गति कर रही है। यदि चाल ज्ञात हो, तो हम किसी दिए गए समय अंतराल में वस्तु द्वारा तय की गई दूरी ज्ञात कर सकते हैं। परंतु,उस समय अंतराल के बाद वस्तु की स्थिति को जानने के लिए,हमें उस दिशा का भी ज्ञान होना चाहिए जिसमें वह वस्तु गति कर रही है। जब हमें गतिशील वस्तु की चाल(speed) और दिशा (direction) दोनों ज्ञात हों,तो हमें उस वस्तु का वेग(velocity) प्राप्त होता है।

उदहारण के लिए,जब हम कहते है कि किसी कार का वेग '60 km/h पूर्व' है तो हमारे कहने का तात्पर्य होता है कि कार 60 km/h की चाल से पूर्व(east) दिशा की ओर जा रही है।

यदि किसी वस्तु की चाल या उसकी गति की दिशा में परिवर्तन हो,तो वस्तु के वेग में परिवर्तन हो जाता है। उदहारण के लिए वेग, '15 m/s पूर्व' और वेग 15 m/s उत्तर ' एक नहीं हैं। यहाँ वेग का परिणाम '15 m/s' तो एक है,परंतु वेग की दिशाएँ भिन्न हैं। उसी प्रकार वेग '10 m/s पश्चिम' और वेग '15 m/s पश्चिम' भी भिन्न हैं,क्योंकि यहाँ दिशा 'पश्चिम' तो एक है,परंतु चाल भिन्न हैं।

वेग को पूरी तरह दर्शाने के लिए परिणाम के साथ-साथ दिशा भी आवश्यक है,अतः,वेग भी विस्थापन के समान सदिश(vector) राशि है।

वेग का मात्रक -स्पष्ट है कि वेग का वही मात्रक है जो चाल का है। अतः,वेग का मात्रक मीटर/सेकंड(m/s) या किलोमीटर/घंटा(km/h) इत्यादि हो सकता है।

वेग - कीसी गतिमान वस्तु का वेग इकाई समय में वस्तु का विस्थापन है।

अर्थात, वेग =विस्थापन /समय

अतः,यदि समय अंतराल t में किसी वस्तु का विस्थापन s हो, तो वेग का परिणाम

चूँकि समय हमेशा आगे बढ़ता है,इसीलिए t हमेशा धनात्मक होगा ,अतः वेग का चिन्ह वही होगा जो विस्थापन का है। जब विस्थापन धनात्मक (धनात्मक दिशा में) है ,तो गति धनात्मक दिशा में होती है और वेग धनात्मक होता है,चाहे निर्देशक रेखा पर कहीं भी विस्थापन होता हो।इसके विपरीत,जब विस्थापन ऋणात्मक है तो वेग ऋणात्मक होता है और गति ऋणात्मक दिशा में होती है।

उदहारण के लिए,चित्र में यदि प्रत्येक विस्थापन (s 1 और s 2 ) 0.5 सेकंड में (मान लिया) हुआ हो,अर्थात t=0.5 s ,तब वेग

v 1 = s 1 /t =+2 m /0.5 s =+20 m /5 s=+4 m /s

चाल(speed) सिर्फ बताती है कि वस्तु कितनी तेज चल रही है और इसमें दिशा का ख्याल नहीं किया जाता। चाल वेग का सिर्फ परिणाम(magnitude) होती है। उपर्युक्त दोनों वेग के लिए चाल 4 m/s है।

चाल और वेग में अंतर

चाल इकाई समय में चली गई दूरी है जिसमें गति की दिशा का जिक्र नहीं होता। अतः, चाल को सिर्फ परिणाम होता है और यह अदिश राशि है। इसके विपरीत,वेग बताई गई दिशा में इकाई समय में चली गई दूरी है। अतः,वेग को परिणाम और दिशा दोनों होते हैं और यह सदिश राशि है।

चाल में परिवर्तन सिर्फ उसके परिमाण में परिवर्तन से संभव है,जबकि वेग में परिवर्तन उसके परिणाम में,उसकी दिशा में या परिमाण और दिशा दोनों में परिवर्तन से हो सकता है। अतः,

द्रष्टव्य - हमने देखा है कि जब कोई कण बिना दिशा-परिवर्तन के सरल रेखा पर चले तो विस्थापन का परिणाम और तय की गई दूरी,दोनों बराबर होंगें।

जब किसी वस्तु का वेग बदल रहा है,तो कहा जाता है कि वस्तु त्वरित हो रही (accelerating) है।

  • त्वरण धनात्मक माना जाता है यदि वेग बढ़ रहा होता है।
  • त्वरण ऋणात्मक माना जाता है यदि वेगघट रहा होता है।
  • ऋणात्मक त्वरण क अवत्वरण(deceleration) या मंदन(retardation) भी कहा जाता है।

यदि t 1 से t 2 के बीच समय अंतराल में वेग v 1 से बदलकर v 2 हो जाए,तो वेग में परिवर्तन,v 2 -v 1 और समय अंतराल t 2 - t 1 के अनुपात को इस समय अंतराल में औसत त्वरण a कहा जाता है, अर्थात

a =v 2 -v 1 / t 2 - t 1

औसत त्वरण की दिशा वेग में परिवर्तन की दिशा में होती है।अतः, त्वरण को परिणाम और दिशा दोनों है ,अर्थात त्वरण एक सदिश राशि है।

द्रष्टव्य - यदि त्वरण की दिशा वेग की दिशा में हो तो वेग का परिमाण बढ़ेगा और यदि त्वरण की दिशा वेग की दिशा के विपरीत हो तो वेग का परिमाण घटेगा।

दुबई में सोने की बढ़ी कीमत, खरीदने से पहले चेक कर लें आज का नया रेट

जानकारी के अनुसार, सोने का हाजिर भाव 9:20 बजे संयुक्त अरब अमीरात के समय तक $ 10.2 प्रति औंस या 0.55 प्रतिशत उछलकर 1,853.8 डॉलर प्रति औंस हो गया है। वहीं सप्ताह के मध्य में सोने की कीमतें 1,808 डॉलर के निचले स्तर से पलटकर सप्ताह के अंत में मामूली रूप से 1,843 डॉलर पर पहुंच गईं है।

वहीं यूएई में सोमवार को सोने की कीमतों में एक दिरहम प्रति ग्राम से अधिक की तेजी आई। इसी के साथ दुबई गोल्ड एंड ज्वैलरी ग्रुप के आंकड़ों से पता चलता है कि 24K खुदरा सरल चलती औसत क्या है सोने की कीमत Dh1.25 से बढ़कर Dh224.5 प्रति ग्राम हो गई, जो कि Dh223।25 के पिछले बंद से थी। इस बीच, कीमती धातुओं के अन्य प्रकारों की कीमत भी Dh1 और Dh1.25 प्रति ग्राम के बीच बढ़ गई। वहीं डेटा से पता चला है कि सोमवार सुबह 22K सोने की खुदरा कीमत Dh210.75, 21K Dh201।25 और 18K Dh172.5 प्रति ग्राम थी।

सेंचुरी फाइनेंशियल के मुख्य निवेश अधिकारी विजय वलेचा ने कहा कि उपभोक्ता कीमतों में उम्मीद से ज्यादा बढ़ोतरी और साप्ताहिक बेरोजगार दावों में गिरावट के कारण धातु पर 14 महीने के निचले स्तर पर गिरावट आई है, क्योंकि इससे बढ़ती मुद्रास्फीति और उच्च की संभावनाओं पर चिंता बढ़ गई ब्याज दर है। हालांकि, अमेरिकी खुदरा बिक्री डेटा रिलीज बाजार के पूर्वानुमान से नीचे आया, जिसने डॉलर को खींच लिया और धातु का समर्थन किया।

हालांकि धातु को मुद्रास्फीति के खिलाफ बचाव के रूप में माना जाता है, लेकिन अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा अर्थव्यवस्था को ठंडा करने के लिए ब्याज दरों को बढ़ाने के लिए मजबूर होने की संभावना ने सर्राफा की बढ़त को सीमित कर दिया है। वें उन्होंने कहा कि सभी की निगाहें अगले सप्ताह फेड सदस्य भाषणों और वैश्विक क्रय प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) के आंकड़ों पर टिकी होंगी।

इसी के साथ वलेचा ने कहा कि “यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बैल इस कदम को भुनाने में सक्षम हैं या धातु 200-दिवसीय सरल चलती औसत (एसएमए) बाधा को तोड़ने के लिए अपने संघर्ष के साथ जारी है, जो वर्तमान में $ 1,849-50 क्षेत्र के पास है। यूएई में, 24k सोने की कीमतें आने वाले सप्ताह के लिए Dh218 और Dh227 के बीच कारोबार करने की संभावना है।

Kinematics ( गतिकी - भाग 1 )

उत्तर- जब कोई वस्तु एक सरल रेखा में गति करती है या उसकी गति का निर्देशांक किसी एक निश्चित दिशा में हो तो उसकी गति को एक विमीय गति कहते है। इसे ऋजुरेखी गति भी कहते हैं। जैसे- रेलवे ट्रैक पर जाती हुई रेलगाड़ी की गति, सीधी सड़क पर चलती हुई कार की गति आदि । इस स्थिति में ग्राफ के x-अक्ष को इसके समानांतर लेने पर

उत्तर- जब कोई वस्तु किसी समतल पर गति करती है तथा उसकी गति पार्श्व रेखीय होती है, तो उसे द्विविमीय गति कहते हैं। इस स्थिति में वस्तु की गति की दिशा x-अक्ष और y-अक्ष दोनों निर्देशांक को दर्शाती है। जैसे- जमीन पर रेंगते हुए कीड़े की गति, नदी पर नाव की गति, वृत्तीय गति।.

उत्तर- जब कोई वस्तु आकाश में गति करती है तो उसकी गति को त्रिविमीय गति कहते हैं। इस स्थिति में वस्तु के तीनों निर्देशांक, x-निर्देशांक y-निर्देशांक तथा z-निर्देशांक परिवर्तित होते हैं। जैसे - वायुयान, उड़ती हुई पतंग या चिड़िया की गति, गैस के अणुओं की गति आदि ।

उत्तर- एक विशेष दिशा में गतिशील वस्तु की स्थिति परिवर्तन की न्यूनतम दूरी को उसका विस्थापन कहते हैं। यह एक सदिश राशि है। S.I. पद्धति में इसका मात्रक मीटर होता है।

उत्तर- किसी निश्चित समय में वस्तु द्वारा तय की गयी पथ की कुल लम्बाई को दूरी कहते है। यह एक अदिश राशि है। इसका S.I. मात्रक मीटर है। जैसे- यदि कोई वस्तु वृत्तीय गति कर रही है। तो एक चक्कर के बाद अपनी पूर्वावस्था में आ जाती है, तो उसका विस्थापन शून्य होगा, किन्तु इसके द्वारा तय की गयी दूरी वृत्त की परिधि के बराबर होगी।

उत्तर- गतिशील वस्तु के विस्थापन की दर को उसका वेग कहते हैं । अथवा, एक निश्चित दिशा में वस्तु द्वारा एकांक समय में तय की गयी दूरी को उसका वेग कहते हैं। इसका मात्रक मीटर/सेकेण्ड

उत्तर- किसी गतिशील वस्तु के स्थिति परिवर्तन की दर को उसकी चाल कहते हैं । अथवा, किसी वस्तु द्वारा एकांक समय में तय की गयी दूरी को उसकी चाल कहते हैं । यह एक अदिश राशि है । इसका मात्रक मीटर/सेकेण्ड तथा विमीय सूत्र [LT⁻¹] है।

उत्तर- जब कोई वस्तु सदैव उसी दिशा में समान समयान्तराल में समान दूरी तय करती है तो उसकी गति एक समान गति कहलाती है।

उत्तर- जब समान समयान्तराल में किसी वस्तु का विस्थापन समान होता है, तो उसका वेग एक समान वेग कहलाता है। जैसे-किसी समांगी माध्यम में प्रकाश तथा ध्वनि का वेग एक समान वेग होता है।

उत्तर- जब कोई वस्तु समान समयान्तराल में असमान दूरी तय करती है तो उसकी गति असमान गति कहलाती है । इस स्थिति में वस्तु के वेग को असमान वेग तथा चाल को असमान चाल कहते हैं।

उत्तर- किसी निश्चित समयान्तराल में वस्तु के कुल विस्थापन और कुल समयान्तराल के अनुपात को उसका औसत वेग कहते हैं।

उत्तर- किसी निश्चित समयान्तराल में तय की गयी कुल दूरी तथा कुल समयान्तराल के अनुपात को उसकी औसत चाल कहते हैं । सरल रेखा में गतिशील वस्तु का औसत वेग, औसत चाल के बराबर होता है।

उत्तर- जब कोई वस्तु एक सरल रेखा में एक समान गति करती है तो उसकी गति को एक समान सरलरेखीय गति कहते हैं।

उत्तर- गतिशील वस्तु के वेग और समय के बीच खींचा गया ग्राफ वेग-समय ग्राफ कहलाता है। एक समान गति में वस्तु का वेग नियत होता है। अत: वेग समय ग्राफ एक सरल रेखा होती है जो समय अक्ष के समान्तर होती है।

उत्तर- गतिशील वस्तु की विभिन्न क्षणों पर स्थिति और संगत समय के बीच खींचा गया ग्राफ स्थिति-समय ग्राफ कहलाता है। एक समान गति में यह एक सरल रेखीय होती है जो समय अक्ष से किसी कोण पर झुकी होती है । इसकी प्रवणता वस्तु के वेग के बराबर होती है।

उत्तर- किसी गतिशील या स्थिर वस्तु के सापेक्ष दूसरी वस्तु का आपेक्षिक वेग वह दर है जिससे कि पहली वस्तु के सापेक्ष दूसरी वस्तु की स्थिति बदलती है।

प्रश्न 27. आपेक्षिक वेग का क्या सूत्र होगा ? जब , V₁तथा V₂ वेग से क्रमश: गतिशील दो वस्तुओं के बीच का कोण θ है ?

उत्तर- किसी दूसरी वस्तु के सापेक्ष पहली वस्तु का आपेक्षिक वेग अर्थात् परिणामी वेग v = √(v₁² + v₂² - 2v₁v₂ cosec θ), जहाँ v₁ पहली वस्तु का वेग तथा v₂ दूसरी वस्तु का वेग तथा θ उसके बीच का कोण है।

यदि परिणामी वेग v⃗ वेग v₁⃗ की दिशा से α कोण बनाता है तो हम पाते हैं कि :- tan α सरल चलती औसत क्या है = v₂sinθ / v₁ - v₂cosθ होता है।

विशेष स्थितियाँ :- (क) यदि पहली तथा दूसरी वस्तु एक ही दिशा में गतिशील हों तो θ = 0° । अत: v = v₁ - v₂ होता है।

उत्तर- समय के साथ वेग में परिवर्तन की दर को त्वरण कहते हैं। इसका S.I. मात्रक मीटर/सेकेण्ड² तथा विमीय सूत्र [LT⁻²] है।

उत्तर- जब समान समयान्तराल में वस्तु के वेग में समान परिवर्तन होता है तो उसका त्वरण एकसमान त्वरण कहलाता है। इस स्थिति में वस्तु की गति एक समान त्वरित गति कहलाती है।

उत्तर- जब समान समयान्तराल में वस्तु के वेग में असमान परिवर्तन होता है तो उसका त्वरण असमान (परिवर्ती) त्वरण कहलाता है। इस स्थिति में औसत त्वरण और सरल चलती औसत क्या है तात्क्षणिक त्वरण ज्ञात किया जाता है।

उत्तर- ऋणात्मक त्वरण को मंदन कहते हैं। जब किसी वस्तु को ऊपर की तरफ फेंका जाता है तो उसका वेग घटने लगता है। इस स्थिति में उत्पन्न त्वरण ऋणात्मक होता है, जिसे मंदन कहते है।

(क) v = u + at जहाँ u वस्तु का प्रारम्भिक वेग, v वस्तु का अंतिम वेग, a वस्तु का त्वरण तथा t समय है । इसे गति के प्रथम समीकरण कहते हैं ।

उत्तर- (क) v = u - at (ख) s = ut - 1/2at² तथा (ग) v² = u² - 2as , जहाँ u वस्तु का प्रारम्भिक वेग, v वस्तु का अंतिम वेग, t समय, a मंदन तथा s वस्तु द्वारा तय की गयी दूरी है।

उत्तर- वस्तु के विरामावस्था से चलना प्रारम्भ करने की स्थिति में u = 0 अत: (क) v = at (ख) s = 1/2at² तथा (ग) v² = 2as होता है।

उत्तर- वस्तु के गुरुत्व के अधीन स्वतंत्रतापूर्वक गिरने की स्थिति में, u = 0, a = g तथा s = h होता है। अत: (क) u = gt (ख) h = 1/2gt² तथा (ग) v² = 2gh होता है।

उत्तर- tवें सेकेण्ड में तय की गयी दूरी, sₜ = u + 1/2a(2t - 1) होता है, जहाँ u वस्तु का प्रारम्भिक वेग, a वस्तु का त्वरण तथा t समय है।

(ख) त्वरण a = dv / dt = d²x / dt² जहाँ dv / dt समय के सापेक्ष वस्तु के तात्क्षणिक वेग के अवकल गुणांक या अवकलज तथा d²x / dt² समय सापेक्ष वस्तु की स्थिति निर्देशांक के द्वितीय अवकलज हैं।

उत्तर - जब किसी वस्तु को किसी प्रारम्भिक वेग से ऊर्ध्वाधर दिशा से भिन्न किसी अन्य दिशा में फेंका जाता है तो वह गति करती हुई पृथ्वी पर किसी अन्य स्थान पर जा गिरती है , उसकी गति प्रक्षेप्य गति कहलाती है। फेंकी जानेवाली वस्तु को प्रक्षेप्य कहते हैं। प्रक्षेप्य पथ परवलयाकार होता है। जैसे- बन्दूक से छोड़ी गयी गोली की गति, क्षैतिज दिशा में फेंकी गयी गेंद की गति, गतिशील विमान से गिराये गए बम की गति आदि ।

उत्तर - वृत्तीय गति करनेवाली वस्तु को एक चक्कर पूरा करने में लगे समय को उसका आवर्तकाल कहते हैं। इसे T द्वारा व्यक्त किया जाता है। इसका मात्रक सेकेण्ड तथा विमीय सूत्र [T] होता है।

उत्तर - वृत्तीय गति करनेवाली वस्तु एक सेकेण्ड में जितने चक्कर पूरा करती है उसे उसकी आवृति कहते हैं। यह आवर्तकाल का व्युत्क्रम होता है। इसका मात्रक हर्ट्ज तथा विमीय सूत्र [T⁻¹] होता है। इसे v द्वारा व्यक्त किया जाता है।

उत्तर - वृत्तीय गति करनेवाला कोई कण दिए गए समयान्तराल में जितने कोण से घूमता है उसे उसका कोणीय विस्थापन कहते हैं। इसका मात्रक रेडियन होता है। यह एक विमाहीन सदिश राशि है।

300 m सरल रेखीय पथ पर जोसेफ जॉगिंग करता हुआ 2 min 30 s में एक सिरे A स

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Mentha Oil Price Today: मेंथा ऑयल में गिरावट जारी, अब क्या करें निवेशक

Mentha Oil Price Today: मेंथा ऑयल में गिरावट जारी, अब क्या करें निवेशक

मंगलवार को भी मेंथा ऑयल में गिरावट आई है.

Mentha Oil Price Update: सोमवार को तेज प्रॉफिट बुकिंग के बाद मंगलवार को भी मेंथा ऑयल में गिरावट आई है. मेंथा 14.70 रुपये कमजोरी के साथ 1240.20 रुपये प्रति किलो के भाव पर ट्रेड कर रहा है. मेंथा सोमवार को करीब 39 रुपये की गिरावट के साथ 1254.90 रुपये के भाव पर बंद हुआ था. वहीं आज 1245.60 रुपये के भाव पर खुला. एक्सपर्ट का कहना है कि मार्केट में डिमांड कमजोर रहने की वजह से मेंथा में गिरावट है. आज भी जबतक मेंथा 1270 रुपये के भाव पर सस्टेन नहीं करता, गिरावट बढ़ सकती है.

क्या मेंथा में और बढ़ेगी बिकवाली?

कैपिटल एम के रिसर्च हेड रोमेश तिवारी का कहना है कि मेंथा की बात करें तो जुलाई वायदा में मंदी का रुख दिख रहा है. लेकिन पिछले हफ्ते की बात करें तो यह डेली चार्ट पर 1320 के स्तर तक मूव किया, लेकिन 50-दिवसीय सरल चलती औसत से ऊपर नहीं रहा और पिछले सप्ताह 50 दिन के सिंपल मूविंग एवरेज पर सस्टेन नहीं कर पाया और करेक्शन के बाद हफ्ते के अंत में 1293.30 के स्तर पर बंद हुआ.

इस हफ्ते की बात करें तो कमजोर मांग और अराइवल बढ़ने की वजह से मेंथा में गिरावट जारी है. उनका कहना है कि मेंथा में यहां से और बिकवाली देखी जा सकती है. उनका कहना है कि मेंथा में आज 1270 और 1320 के स्तर पर रेजिस्टेंस दिख रहा है. वहीं 1224 और 1170 के स्तर पर सपोर्ट है.

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Tracxn Technologies: बाजार में मजबूत एंट्री, लिस्टिंग डे पर 24% रिटर्न, मुनाफा वसूली करें या शेयर में बने रहें

केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया का कहना है कि सोमवार को मेंथा करीब 2.97 फीसदी गिरावट के साथ 1254.9 के स्तर पर बंद हुआ. कंज्यूमिंग इंडस्ट्री की ओर से लगातार डिमांड कमजोर रहने का असर मेंथा में गिरावट के रूप में दिखा.

उनका कहना है कि मेंथा में आज नीचे की ओर 1239 के स्तर पर सपोर्ट दिख रहा है. यह स्तर टूटता है तो मेंथा में 1223.1 रुपये तक गिरावट आ सकती है. वहीं, उपर की ओर 1282.9 के स्तपर पर रेजिस्टेंस है. यह स्तर टूट जाता है सरल चलती औसत क्या है सरल चलती औसत क्या है तो मेंथा 1310.9 का भाव देख सकता है.

चीन, US मेंथा ऑयल के बड़े आयातक

अमेरिका और चीन के बीच चह रहे ट्रेड वार का असर भी मेंथा ऑयल की कीमतों पर दिखाई देगा. चीन और अमेरिका भारतीय मेंथा ऑयल के बड़े आयातक हैं. दोनों देशों के बीच ट्रेड वार से इस बार निर्यात कम रहेगा. इसके चलते भी कीमतों पर दबाव बना रह सकता है. बता दें, भारत अपने कुल मेंथा उत्पादन का करीब 60 से 62 फीसदी निर्यात करता है.

Mentha Oil: फार्मा इंडस्ट्री में ज्यादा इस्तेमाल

मेंथा एक खुशबूदार जड़ी बूटी और भारत में इसे जापानी पुदीना के नाम से जाना जाता है. मेंथा तेल और उसके डेरिवेटिव्स को बड़े पैमाने पर भोजन, दवा, इत्र और फ्लेवरिंग इंडस्ट्री में उपयोग किया जाता है. भारत मेंथा तेल और उसके डेरिवेटिव्स का सबसे] बड़ा उत्पादक और निर्यातक है.

इसकी कीमतों पर उत्पादन और घरेलू मांग के अलावा चीन, अमेरिका और सिंगापुर जैसे प्रमुख आयातक देशों से आयात की मांग और डॉलर के मुकाबले रुपये की कीमत पर भी निर्भर करती है. सर्दियों में आमतौर पर दवा कंपनियों की मेंथा ऑयल के लिए घरेलू मांग बढ़ जाती है.

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